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बालकाण्ड
वाल्मीकि रामायण Valmiki Ramayan
अयोध्याकाण्ड

वन के लिये प्रस्थान
महाराज की आज्ञानुसार सुमन्त रथ ले आये। राम, सीता और लक्ष्मण ने वहाँ पर उपस्थित सभी लोगों का यथोचित अभिवादन किया और रथ पर चढ़कर चलने को उद्यत हुये। सुमन्त के द्वारा अश्वों की रास सम्भालकर रथ हाँकना आरम्भ करते ही अयोध्या के लाखों नागरिक 'हा राम! हा राम!!' कहते हुये उस रथ के पीछे दौड़ना शुरू कर दिया। 瓥352;थ की गति तेज हो जाने पर नगर निवासी रथ के साथ-साथ दौड़ पाने में असमर्थ हो गये तो वे उच्च स्वर में चिल्ला-चिल्ला कर कहने लगे, "रथ को रोको, हम राम के दर्शन करना चाहते हैं। भगवान ही जानते हैं कि अब फिर कब हम इनके दर्शन कर पायेंगे।" राजा दशरथ भी कैकेयी के प्रकोष्ठ से निकल कर'हे राम! हे राम!!' कहते हुये विक्षिप्त की भाँति रथ के पीछे दौड़ रहे थे। हाँफते हुये महाराज को रथ के पीछे दौड़ते देखकर सुमन्त ने रथ को रोका और बोले, "हे पृथ्वीपति! रुक जाइये। इस प्रकार राम, सीता और लक्ष्मण के पीछे मत दौड़िये। ऐसा करना पाप है। आपकी आज्ञा से ही तो राम वनगमन कर रहे हैं, इसलिये उन्हें रोकना सर्वथा अनुचित तथा व्यर्थ है।" सुमन्त के वचन सुन महाराज वहीं रुक गये।
इसके बाद रथ तीव्र गति से आगे बढ़ गया किंतु प्रजाजन रोते बिलखते उसके पीछे ही दौड़ते रहे।
चित्रलिखित से खड़े महाराज उस रथ को तब तक एकटक निहारते रहे जब तक रथ की धूलि दृष्टिगत होती रही। धूलि दिखना बन्द हो जाने पर वे वहीं 'हा राम! हा लक्ष्मण!!' कहकर भूमि पर गिर पड़े और मूर्छा को प्राप्त हो गये। वहाँ पर उपस्थित मन्त्रियों ने तत्काल उन्हें उठाकर एक स्थान पर लिटाया। मूर्छा भंग होने पर मृतप्राय से महाराज धीरे-धीरे अस्फुट स्वर में कहने लगे, "सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में मैं सबसे बड़ा अभागा व्यक्ति हूँ जिसके दो-दो पुत्र एक साथ वृद्ध पिता को बिलखता छोड़कर वन को चले गये। अब मेरा जीवन व्यर्थ है। " फिर वे मन्त्रियों से बोले, "मैं महारानी कौशल्या के महल में जाना चाहता हूँ। मेरा शेष जीवन वहीं व्यत瓥#2368;त होगा क्योंकि अब वहाँ के अतिरिक्त मुझे अन्यत्र कहीं भी शान्ति नहीं मिल पायेगी।
कौशल्या के महल में महाराज पुनः राम और लक्ष्मण के वियोग के कारण मूर्छित हो गये। उनकी दशा देखकर महारानी कौशल्या विलाप करने लगीं। कौशल्या के विलाप को सुनकर महारानी सुमित्रा भी वहाँ आ गईं और उनको अनेक प्रकार से समझाकर शान्त किया। फिर दोनों रानियाँ महाराज दशरथ की मूर्छा दूर करने का प्रयास करने लगीं।
आगे की कथा - तमसा के तट पर
Valmiki Ramayn is a great Hindu epic created by Maharshi Valmiki in Sanskrit language. Maharshi Valmiki describes the holly character or Lord Rama in Valmiki Ramayan. Lord Rama is treated as a person by Manarshi Valmiki where as in the epic Ramcharitmanas Saint Tulsidas treats him as an incarnation of Lord Vishnu.
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