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बालकाण्ड

वाल्मीकि रामायण
Valmiki Ramayan

बालकाण्ड

valmiki ramayan

राम द्वारा धनुष भंग

लक्ष्मण को इस प्रकार अत्यन्त क्रुद्ध एवं आवेश में देख कर राम ने संकेत से उन्हें अपने स्थान पर बैठ जाने का निर्देश दिया और गुरु विश्वामित्र की ओर देखने लगे मानो पूछ रहे हों के वर्तमान परिस्थिति में मुझे क्या करना चाहिये। विश्वामित्र ने उन्हें समझा कर कहा, "वत्स! तुम धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर लक्ष्मण ने सूर्यकुल की जिस मर्यादा एवं गौरव वर्णन किया है उसे सिद्ध कë瓥; के दिखाओ।"

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गुरु की आज्ञा पाकर रामचन्द्र मन्द गति से गौरवपूर्ण पग बढ़ाते हुये शिव जी के धनुष के पास पहुँचे। राम को धनुष की ओर जाते देख सीता और उनकी सखियाँ तथा जनकपुरी के समस्त दर्शकगण अत्यंन्त प्रसन्न हुये। तभी उनकी प्रसन्नता संशय में परिवर्तित हो गई। वे सोचने लगे कि जब इतने बड़े-बड़े विश्वविख्यात शक्तिशाली राजा और राजकुमार इस शिव जी के धनुष को हिला नहीं सके तो राम जैसे सुकुमार किशोर पिनाक की प्रत्यंचा चढ़ाने में कैसे सफल हो सकेंगे? सीता भी मन ही मन परमात्मा से प्रार्थना करने लगीं कि हे सर्वशक्तिमान! इन्हें इनके उद्देश्य में सफलता प्रदान कीजिये। मेरा हृदय भी इनकी ओर आकर्षित瓥 हो गया है। अतः इसकी लाज भी आपको ही रखनी है। हे प्रभो! आप अपनी अद्भुत शक्ति से इस धनुष को इतना हल्का कर दीजिये कि यह सरलता से उनके द्वारा उठाया जा सके।

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धनुष के पास पहुँचकर राम ने धनुष को बीच से पकड़कर सरलतापूर्वक उठा लिया और खेल ही खेल में उस पर प्रत्यंचा चढ़ा दी। प्रत्यंचा चढ़ाकर ज्योंही उन्होंने धनुष की डोर पकड़कर कान तक खींची त्योंही वह धनुष भयंकर शोर मचाता हुआ तड़तड़ा कर टूट गया। उस नाद से अधिकांश दर्शक मूर्छित होकर गिर पड़े। केवल विश्वामित्र, राजा जनक, राम, लक्ष्मण आदि कुछ ही ऐसे लोग थे जिन पर इस भयंकर स्थिति का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। कुछ काल पश्चात् जब सबकी मूर्छा दूर हुई तो वे राम की सराहना करने लगे।

धनुष भंग हो जाने पर राजा जनक ने विश्वामित्र स瓥5; कहा, "मुनिवर! मेरी प्रतिज्ञा पूर्ण हुई इसलिये अब मैं सीता का विवाह रामचन्द्र के साथ करना चाहता हूँ। यदि आप आज्ञा दें तो मैं अपने मंत्रयों और पुरोहित को विवाह का संदेश लेकर महाराजा दशरथ के पास अयोध्या भेज दूँ।" विश्वामित्र प्रसन्न होकर बोले, "राजन्! आपको ऐसा ही करना चाहिये। मंत्री को यह भी आदेश दे दें कि वे राजा दशरथ को बता दें कि दोनों राजकुमार कुशलपूर्वक यहाँ पहुँच गये हैं।"

विश्वामित्र के वचनों से सन्तुष्ट होकर मिथिलापति जनक ने सीता को बुलवाया। वे अपनी सखियों के साथ हाथ में वरमाला लिये मन्थर गति से लजाती हुई वहाँ आईं जहाँ धनुष को तोड़ने के पश्चात श्री रामचन्द्र खड़े थे। सखियों ने मंगल गान प्रारम्भ किया और लज्जा, संकोच एवं हर्ष के भावों से परिपूर्ण सीता जी ने धीरे से श्री राम के गले में वरमाला डाल दी瓥।

आगे की कथा - अयोध्या में तैयारियाँ

Valmiki Ramayn is a great Hindu epic created by Maharshi Valmiki in Sanskrit language. Maharshi Valmiki describes the holly character or Lord Rama in Valmiki Ramayan. Lord Rama is treated as a person by Manarshi Valmiki where as in the epic Ramcharitmanas Saint Tulsidas treats him as an incarnation of Lord Vishnu.

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